खबर युग

यूपी चुनाव 2027: दिखावे पर ब्रेक और काम पर फोकस, बीजेपी की जीत का नया प्लान तैयार कर रहे विनोद तावड़े

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उत्तर प्रदेश प्रभारी बनने के बाद विनोद तावड़े यूपी के पांच दौरे कर चुके हैं। उनको दिखावे से परहेज है और उनका विधानसभा चुनाव के लिए जमीनी तैयारी पर जोर है। वे बिहार में बीजेपी की जीत के लिए अपनाई गई रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं।

Gaurav Dwivedi
October 2, 2026
4 min read
यूपी चुनाव 2027: दिखावे पर ब्रेक और काम पर फोकस, बीजेपी की जीत का नया प्लान तैयार कर रहे विनोद तावड़े

विशेष खबर प्रस्तुति- गौरव द्विवेदी(संपादक)खबर युग (Khabar Yug)

लखनऊ: बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े गुरुवार को लखनऊ के दौरे पर पहुंचे। यूपी का पार्टी प्रभारी पद संभालने के एक महीने से भी कम समय में राज्य का यह उनका पांचवां दौरा था। उनका यह दौरा एक सामान्य संगठनात्मक गतिविधि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण लग रहा है। यूपी के चुनाव में तावड़े की भूमिका अहम है। उन्हें पिछले साल बिहार चुनावों में बीजेपी की जीत के मुख्य रणनीतिकारों में से एक माना जाता है।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बाकी हैं। ऐसे में विनोद तावड़े बीजेपी के एक प्रमुख रणनीतिकार के तौर पर उभर रहे हैं। उन्हें बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे को धार देने और समाजवादी पार्टी व उसकी सहयोगी कांग्रेस के नेतृत्व वाले आक्रामक विपक्ष के खिलाफ पार्टी की चुनावी संभावनाओं को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

दिखावे के बजाय संगठन को मजबूत करने पर जोर

विनोद तावड़े ने शुरुआत से ही अपना दृष्टिकोण स्पष्ट कर दिया था। बताया जाता है कि पांच सितंबर को लखनऊ के अपने पहले दौरे के दौरान उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को बड़े-बड़े होर्डिंग लगाने या भव्य स्वागत समारोह आयोजित करने से बचने की सलाह दी थी। उनका संकेत स्पष्ट था कि दिखावे के बजाय संगठन को मजबूत करने और चुनावों की तैयारी पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

तावड़े का नजरिया अन्य नेताओं से अलग

विनोद तावड़े का यह नजरिया इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि पार्टी के यूपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित अन्य वरिष्ठ पार्टी नेताओं का लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में उनके दौरों के दौरान भव्य स्वागत किया गया था। तावड़े का विचार इसके बिल्कुल विपरीत था। यह तावड़े की संयमित काम पर केंद्रित कार्यशैली को दर्शाता है। उनके मुताबिक बीजेपी के लिए यह समय आने वाली अहम चुनावी लड़ाई के लिए कमर कसने का है।

सूत्रों ने बताया कि गुरुवार को हुई बैठक में विनोद तावड़े ने विपक्ष के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव पर चिंता जताई। विपक्ष के इस चुनावी फॉर्मूले के कारण 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा था।

संगठन और सरकार में तालमेल पर ध्यान

उत्तर प्रदेश बीजेपी के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि पार्टी जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और संगठन व सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दे रही है। तावड़े संगठनात्मक सदस्यों के साथ-साथ सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक के साथ भी आमने-सामने बातचीत कर रहे हैं। तावड़े की 11 सितंबर को लखनऊ की अपनी दूसरी यात्रा के दौरान उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष भी थे। तावड़े ने तब कई अहम समीक्षा बैठकें की थीं। इन बैठकों में केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, कई मंत्री और संगठन के प्रमुख नेता शामिल हुए थे।

विधायकों के कामकाज का आकलन

जमीनी तैयारी पूरी करने के बाद विनोद तावड़े ने 17 सितंबर को गोरखपुर इलाके के हिसाब से संगठन का आकलन करना शुरू किया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने विधायकों के कामकाज का आकलन करने और विधानसभा चुनावों के लिए संभावित उम्मीदवारों के बारे में फीडबैक लेने के लिए जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और यूपी बीजेपी नेताओं से बातचीत की।

विनोद तावड़े 21 और 22 सितंबर को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मेरठ और सहारनपुर गए। वहां उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय नेताओं और पार्टी प्रतिनिधियों, जिनमें सांसद, विधायक और एमएलसी शामिल थे, के साथ बंद कमरे में बैठकें कीं। तावड़े अब तीन और चीर अक्टूबर को मथुरा में होने वाली संगठन की उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होंगे।

बिहार चुनाव का मॉडल दोहराने की कोशिश

बीजेपी सूत्रों का कहना है कि विनोद तावड़े यूपी चुनावों में भी बिहार चुनाव वाले मॉडल को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। तावड़े को बीजेपी संगठन के उन प्रमुख सदस्यों में गिना जाता है जिनकी अगुवाई में एनडीए ने 2024 के चुनावों में बिहार की 40 में से 30 लोकसभा सीटें जीती थीं।

यही रणनीति 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में भी अपनाई गई थी। यूपी बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता, जो कि बिहार में वहां के विधानसभा चुनावों के दौरान मौजूद थे, ने बताया कि इस रणनीति में माइक्रो-मैनेजमेंट और जमीनी स्तर पर तालमेल बिठाने को प्राथमिकता दी गई थी। पता चला है कि बिहार के विधानसभा चुनाव से पहले तावड़े ने वहां का कम से कम 15 बार दौरा किया था।

इस खबर को लाइक और शेयर करें

Comments (0)

0/2000 characters

Facebook टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए Facebook में लॉगिन करें

टिप्पणियां अक्षम हैं। व्यवस्थापक से संपर्क करें।

सम्बंधित ख़बरें

UP में वीडियो बना रही श्रद्धा दुबे, पुलिस नेपाल में पीट रही लकीर; कभी भी कर सकती है सरेंडर

शिवा हत्याकांड में फरार श्रद्धा नेपाल से सटे यूपी के एक शहर में छिपी है. पुलिस की टीमें उसकी तलाश में नेपाल से लेकर इस शहर तक खाक छान रही हैं. इस बीच वह वीडियो जारी कर खुद को बेकसूर बता रही है.

यूपी: महानवमी पर 19 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित, CM योगी ने किया ऐलान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महानवमी के अवसर पर राज्य में 19 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. वहीं, 20 अक्टूबर को पहले ही अवकाश घोषित किया जा चुका है.

श्रद्धा के फ्लैट में अंडरवियर में क्यों था शिवा? दिल दहला देगा लीवर डैमेज का रहस्य

लखनऊ के शिवा मर्डर केस में श्रद्धा दुबे नेपाल से खुद को बेकसूर बता रही है, जबकि पुलिस सुसाइड मानने से इनकार कर रही है. मौके के सबूत और पोस्टमार्टम रिपोर्ट हत्या की ओर इशारा करते हैं.

'हिम्मत है तो अखिलेश यादव के बिना रायबरेली जीतकर दिखाओ', राहुल गांधी को राजनाथ सिंह का चैलेंज

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे समाजवादी पार्टी के बगैर अपनी रायबरेली की सीट भी जीतने का सामर्थ्य नहीं रखते हैं।