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दुश्मन का निकलेगा दम! भारतीय नौसेना को मिले 3 स्वदेशी युद्धपोत, INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक

भारतीय नौसेना इस हफ्ते तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों, जिसमें आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस अग्रे और आईएनएस संशोधक को एक साथ कमीशन कर इतिहास रच रही है. ये जहाज समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाएंगे. दूनागिरी सतह और हवाई रक्षा में, अग्रे पनडुब्बी रोधी युद्ध में, और संशोधक समुद्री सर्वेक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

Gaurav Dwivedi
June 21, 2026
5 min read
दुश्मन का निकलेगा दम! भारतीय नौसेना को मिले 3 स्वदेशी युद्धपोत, INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक

कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर तीन स्वदेशी वॉरशिप  INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक भारतीय नौसेना में शामिल हुए। देश में ही डिजाइन किए और बनाए गए जहाजों के शामिल होने से देश की ऑपरेशनल क्षमताएं बढ़ जाएंगी। इस दौरान कार्यक्रम में पीएम मोदी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि इनका निर्माण भारत में हुआ है। डिजाइन भारत में हुआ है। भारतीय इंजीनियरों का कौशल लगा है, परिश्रम लगा है। यह नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है। आज भारत रक्षा क्षेत्र में केवल खरीदार बनकर नहीं रहना चाहता।

भारतीय नौसेना इस हफ्ते इतिहास रचने जा रही है. देश की समुद्री ताकत को और मजबूत करने के लिए कोलकाता में एक साथ तीन आधुनिक युद्धपोतों आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस अग्रे और आईएनएस संशोधक को नौसेना में कमीशन किया जा रहा है. ​सूत्रों के मुताबिक, इस बेहद खास कार्यक्रम में केंद्र सरकार के बड़े मंत्रियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी शामिल हुए. भारतीय नौसेना के इतिहास में यह सिर्फ दूसरा मौका है जब तीन बड़े और आधुनिक युद्धपोत एक साथ देश की सेवा में उतारे जा रहे हैं. इससे पहले पिछले साल जनवरी में मुंबई में ऐसा किया गया था.

1.INS दूनागिरी — ‘दुश्मन के जहाजों का काल’​

यह एक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है. स्टील्थ का मतलब है कि इसका डिजाइन ऐसा है कि यह दुश्मन के रडार की नजर में आसानी से नहीं आता. • नौसेना का घातक युद्धपोत: इसमें भारत की सबसे खतरनाक ब्रह्मोससुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, एडवांस टॉरपीडो लगे हैं. ब्रह्मोस मिसाइल आवाज की रफ्तार से तीन गुना तेजी से हमला करती है, जिसे रोक पाना किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए लगभग असंभव है. • ​हवाई सुरक्षा: इसमें हवा से आने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को हवा में ही उड़ाने के लिए ‘सर्फेस-टू-एयर मिसाइल’ (SAM) और क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) लगे हैं. • ​खास तकनीक: यह CODOG (Combined Diesel or Gas) सिस्टम पर चलता है. यानी सामान्य समय में यह किफायती डीजल इंजन पर चलता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसके गैस टरबाइन चालू हो जाते हैं जो इसे अचानक तेज रफ्तार दे देते हैं.

​2. INS अग्रे— ‘पनडुब्बियों का साइलेंट किलर’​

यह एक एंटी-सबमरीन शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है. इसे खास तौर पर कम गहरे पानी यानी तटीय इलाकों में छिपकर हमला करने वाली दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढकर मारने के लिए बनाया गया है. • दुश्मन का सफाया: पाकिस्तान चीन की मदद से लगातार अपनी ‘हैंगोर-क्लास’ पनडुब्बियों को मजबूत कर रहा है, जो भारत के तटीय इलाकों में घुसपैठ की फिराक में रहती हैं. INS अग्रे उन्हीं के लिए काल है. • ​हथियार: इसमें पानी के नीचे सटीक मार करने वाले टॉरपीडो और भारत में ही बने एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर्स लगे हैं. • ​खोजने की क्षमता: इसमें बेहद आधुनिक सोनार सिस्टम लगा है. समंदर के नीचे पानी कितना भी धुंधला या उथल-पुथल भरा हो, यह दुश्मन की पनडुब्बी की हल्की सी सरसराहट को भी पकड़ लेता है.

​3. INS संशोधक — ‘समंदर की तीसरी आंख’​

यह सीधे तौर पर मिसाइल दागने वाला जहाज नहीं है, बल्कि एक हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप है. लेकिन युद्ध के समय इसकी भूमिका सबसे घातक साबित होती है. • बेहद जरूरी हथियार: किसी भी युद्धपोत या पनडुब्बी को समंदर के अंदर तेजी से आगे बढ़ने के लिए वहां के रास्तों, पहाड़ों और पानी की गहराई का सटीक पता होना चाहिए. INS संशोधक यही काम करता है. यह समंदर के नीचे का पूरा ‘गूगल मैप’ तैयार करता है. • ​हाई-टेक गैजेट्स: यह जहाज AUVs (Autonomous Underwater Vehicles) और ROVs (Remotely Operated Vehicles) से लैस है. ये पानी के नीचे बिना इंसानों के चलने वाले रोबोटिक ड्रोन हैं, जो समुद्र की तलहटी (Seabed) की हाई-रिज़ॉल्यूशन मैपिंग करते हैं. • ​घातक रोल: इसके द्वारा तैयार किए गए सटीक चार्ट्स और मैप्स की मदद से ही भारतीय नौसेना के बाकी युद्धपोत और पनडुब्बियां दुश्मन के इलाके में बिना भटके और बिना अपनी लोकेशन लीक किए सटीक सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं.

भारत की बढ़ेगी धाक

एक लाइन में कहें तो INS दूनागिरी समंदर की सतह और आसमान पर राज करेगा, INS अग्रे पानी के नीचे छिपे दुश्मनों को खत्म करेगा, और INS संशोधक इन दोनों को आगे बढ़ने के लिए समंदर का सबसे सुरक्षित और सटीक रास्ता दिखाएगा. इन तीनों युद्धपोतों के एक साथ आने से भारतीय नौसेना की सतह से होने वाली लड़ाई (Surface Warfare), पनडुब्बी विरोधी अभियानों (Anti-Submarine Operations) और समुद्री सर्वेक्षण की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. यह कदम हिंद महासागर और भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है.

तीन स्वदेशी युद्धपोतों की एक साथ कमीशनिंग, प्रधानमंत्री मोदी भारतीय नौसेना को समर्पित किया. भारतीय नौसेना आज तीन स्वदेशी और अत्याधुनिक युद्धपोतों दुनागिरी (Dunagiri), संशोधक (Sanshodhak) और अग्रय (Agray) को एक साथ अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है. इस कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. भारतीय नौसेना के अनुसार, ये तीनों मल्टी-रोल और युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार प्लेटफॉर्म हैं, जो देश की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को नई मजबूती देंगे.

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