लखनऊ के प्राइवेट अस्पतालों में ‘कट रही जेब’, 60% तक सस्ती दवाएं खरीदकर मरीजों को MRP पर बेची जा रही
लखनऊ के प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की जेब काटने का बड़ा खेल सामने आया है। यहां 30 से 60 प्रतिशत तक सस्ती दवाएं खरीदकर मरीजों से पूरी एमआरपी वसूली जा रही है।

रिसर्च स्टोरी - गौरव द्विवेदी(संपादक)खबर युग (Khabar Yug)
लखनऊः राजधानी के बड़े निजी अस्पतालों में दवाओं की खरीद और बिक्री के नाम पर मरीजों की जेब काटने का बड़ा खेल सामने आया है। अस्पताल संचालक थोक में 30 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक सस्ती दरों पर दवाएं खरीद रहे हैं, लेकिन बिलिंग के वक्त मरीजों से लेबल पर दर्ज पूरी एमआरपी वसूली जा रही है। छूट के नाम पर महज 5 से 10 प्रतिशत देकर खानापूरी की जा रही है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की 26 इंस्पेक्टरों की टीम ने 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को शहर के 12 बड़े निजी अस्पतालों में औचक छापेमारी कर इस घालमेल को बेनकाब किया है।
गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल की ओपीडी फार्मेसी को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि ग्लोब हॉस्पिटल के एक दवा भंडारण को सील कर दिया गया है। दवाओं की गुणवत्ता खराब होने की आशंका को देखते हुए टीमों ने 38 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। इसके साथ ही प्रिंटेड एमआरपी और थोक फर्मों/स्टॉकिस्ट से मिले खरीद मूल्य (पीटीआर) के अंतर की गहन पड़ताल की जा रही है।
जांच के दायरे में 12 अस्पताल
अपोलोमेडिक्स, मेदांता (शहीद पथ), शेखर हॉस्पिटल (इंदिरा नगर), मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी , ग्लोब हॉस्पिटल, रीजेंसी सुपर स्पेशिएलिटी (खुर्रम नगर), डॉ. केएनएस मेमोरियल (गोमती नगर), तलवार स्किन इंस्टिट्यूट (इंदिरा नगर), अवध हॉस्पिटल ऐंड हार्ट सेंटर (आलमबाग), विवेकानंद हॉस्पिटल (निराला नगर), चरक हॉस्पिटल ऐंड रिसर्च सेंटर (दुबग्गा) और मिडलैंड हॉस्पिटल (महानगर)।
किस अस्पताल में क्या 'मर्ज' मिला
अपोलोमेडिक्स, कानपुर रोडः सेल्स इनवाइस और स्टॉक लेजर में हेरफेर। मरीजों की आईपीडी फाइलें और शेड्यूल एच1 दवाओं के अनिवार्य क्रय-विक्रय रजिस्टर गायब मिले। रेकॉर्ड में बैच नंबर तक दर्ज नहीं थे। नतीजतन ओपीडी फार्मेसी बंद करने के आदेश दिए गए।
ग्लोब हॉस्पिटल, राजाजीपुरमः दवाओं की खरीद-बिक्री के कोई अभिलेख नहीं मिले। नियमों की अनदेखी कर दवाएं दो अलग-अलग जगहों पर भंडारित मिली, जिस पर एक स्थान सील कर दिया गया।
रीजेंसी हॉस्पिटल, खुर्रम नगरः बिलों पर फर्म का सही पता नहीं था। दवाओं के भौतिक और कागजी स्टॉक में बड़ा अंतर था। मरीजों को दी गई दवाओं और बिल पर दर्ज बैच नंबरों में भी अंतर मिला।
डॉ. केएनएस मेमोरियल, गोमती नगरः नियमों के विपरीत इनवाइस। बिलों से मरीज का पता, डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर और शेड्यूल एक्स दवाओं के जरूरी लाइसेंस नंबर नदारद थे।
शेखर हॉस्पिटल, इंदिरा नगरः शेड्यूल एक्स दवाओं की खरीद तय लाइसेंस के बजाय सीधे डॉक्टर के नाम से की गई थी। इसके अलावा स्टॉक लेजर और भौतिक स्टॉक में अंतर मिला।
तलवार स्किन इंस्टिट्यूट, इंदिरा नगरः मौके पर फार्मासिस्ट ही गैरहाजिर था। अभिलेखों के बिना 'MEDVOL' ऐप से दवाएं मंगाई जा रही थीं। खरीद इनवाइस पर गलत पता और स्टॉक-बैच में गड़बड़ी पकड़ी गई।
मिडलैंड हॉस्पिटल, महानगरः कोल्ड-चेन मेंटेनेंस वाली जीवनरक्षक दवाओं और सामान्य औषधियों के भौतिक और कागजी स्टॉक में विसंगतिया मिली।
मेदांता और चरक हॉस्पिटलः दोनों ही अस्पतालों में महंगी दवाओं के स्थान पर मरीजों के लिए कोई सस्ती वैकल्पिक दवा उपलब्ध नहीं थी।
अवध हॉस्पिटल, आलमबागः थोक कारोबार न करने का दावा किया, जबकि लुपिन लिमिटेड समेत कई कंपनियों से थोक लाइसेंस पर खरीद पाई गई। भौतिक स्टॉक और लेजर में अंतर के साथ फार्मेसी में गंदगी और खराब भंडारण व्यवस्था मिली।
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