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यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: लखनऊ बनेगा मिसाइल हब, कानपुर से झांसी तक विकसित होंगे रक्षा क्लस्टर

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) क्लस्टर आधारित रणनीति के तहत तेजी से देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।

Gaurav Dwivedi
July 2, 2026
5 min read
यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: लखनऊ बनेगा मिसाइल हब, कानपुर से झांसी तक विकसित होंगे रक्षा क्लस्टर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) अपनी क्लस्टर आधारित रणनीति के माध्यम से देश के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा विनिर्माण केंद्रों में तेजी से विकसित हो रहा है। प्रत्येक नोड की विशिष्ट औद्योगिक क्षमता का लाभ उठाते हुए कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़, झांसी एवं चित्रकूट में यूपीडा द्वारा विशेषीकृत रक्षा औद्योगिक क्लस्टरों का विकास किया जा रहा है। इसके माध्यम से रक्षा डिजाइन, परीक्षण, विनिर्माण, एकीकरण (इंटीग्रेशन) तथा निर्यात तक की सम्पूर्ण वैल्यू चेन विकसित हो रही है। संचालित विनिर्माण इकाइयों, नए औद्योगिक निवेशों तथा अत्याधुनिक परीक्षण अवसंरचना के विकास के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश देश की रक्षा औद्योगिक क्रांति का अग्रणी केंद्र बनकर उभर रहा है।

लघु शस्त्र, गोला-बारूद एवं रक्षा वस्त्रों का प्रमुख केंद्र

कानपुर को लघु शस्त्र (स्मॉल आर्म्स), गोला-बारूद, बैलिस्टिक सुरक्षा प्रणालियों तथा रक्षा वस्त्रों के समर्पित केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज ने अपनी एकीकृत गोला-बारूद निर्माण इकाई का संचालन प्रारम्भ कर दिया है। वहीं अधुनिक मैटेरियल एंड साइंसेज तथा ए.आर. पॉलिमर्स ने रक्षा वस्त्र एवं बैलिस्टिक सुरक्षा सामग्री के क्षेत्र में उत्पादन शुरू कर दिया है। इसके अतिरिक्त डेल्टा कॉम्बैट सिस्टम्स द्वारा लघु शस्त्र एवं गोला-बारूद निर्माण इकाई स्थापित की जा रही है। ये सभी निवेश मिलकर हथियारों, गोला-बारूद तथा सैनिक सुरक्षा प्रणालियों की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित कर रहे हैं, जो घरेलू आवश्यकताओं के साथ-साथ निर्यात बाजारों की मांग भी पूरी करेगी।

कानपुर के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ बनाने हेतु आईआईटी कानपुर में रक्षा परीक्षण अवसंरचना योजना (DTIS) के अंतर्गत अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स टेस्टिंग फाउंडेशन (UASTF) तथा कम्युनिकेशन डिफेंस टेस्टिंग फाउंडेशन (CDTF) की स्थापना प्रस्तावित है। इनके संचालन से मानव रहित विमान (UAV), संचार प्रणालियों तथा अन्य रक्षा प्रौद्योगिकियों के परीक्षण एवं प्रमाणीकरण की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे स्वदेशी रक्षा उत्पादों के विकास एवं नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

मिसाइल, एयरोस्पेस एवं उन्नत रक्षा प्रणालियों का प्रमुख केंद्र

लखनऊ रक्षा कॉरिडोर में मिसाइल, एयरोस्पेस एवं एडवांस्ड सिस्टम्स क्लस्टर के रूप में विकसित हो चुका है। यहां ब्रह्मोस एयरोस्पेस की अत्याधुनिक इकाई अगली पीढ़ी की मिसाइल प्रणालियों का निर्माण कर रही है। साथ ही एरोलॉय टेक्नोलॉजीज द्वारा एयरोस्पेस ग्रेड टाइटेनियम कास्टिंग तथा संकल्प सेफ्टी सॉल्यूशंस द्वारा तकनीकी सुरक्षा उत्पादों का उत्पादन प्रारम्भ किया जा चुका है।


ड्रोन एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का उभरता केंद्र

अलीगढ़ ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीकों, सेंसर एवं प्रिसिजन इंजीनियरिंग के प्रमुख क्लस्टर के रूप में विकसित हो रहा है। यहां Werywin Defence, Nitya Creations तथा Shridha Udyog जैसी इकाइयां पहले से संचालित हैं। वहीं Ancor Research Labs, Allen & Alvan, New Space Research & Technologies, Amitec Electronics, Sidak Technologies तथा Icons Hindustan Aerospace & Defence Systems जैसी कंपनियां यूएवी, एंटी-ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली तथा हेवी-लिफ्ट ड्रोन प्लेटफॉर्म विकसित कर रही हैं।

प्रिसिजन इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस कम्पोनेंट्स एवं लघु शस्त्र निर्माण से जुड़ी इकाइयों की उपस्थिति अलीगढ़ को भविष्य की रक्षा तकनीकों एवं आधुनिक युद्ध प्रणालियों का महत्वपूर्ण केंद्र बना रही है।

विस्फोटक, गोला-बारूद एवं भारी रक्षा विनिर्माण का सबसे बड़ा क्लस्टर

झांसी रक्षा कॉरिडोर के सबसे बड़े विस्फोटक, गोला-बारूद एवं भारी रक्षा विनिर्माण क्लस्टर के रूप में विकसित हो रहा है। यहां भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) की मिसाइल प्रोपल्शन सिस्टम्स निर्माण इकाई स्थापित है तथा कॉरिडोर के सबसे बड़े निवेश भी इसी नोड में प्राप्त हुए हैं।

प्रमुख परियोजनाओं में Goodluck Astra India की विस्फोटक निर्माण एवं आर्टिलरी शेल फिलिंग इकाई, Navbharat Defence Systems का विस्फोटक परिसर, Micron Instruments की एक्सप्लोसिव फिलिंग एवं एम्युनिशन इंटीग्रेशन इकाई तथा NextStrat TechVision की मोर्टार गोला-बारूद निर्माण परियोजना शामिल हैं। इसके अतिरिक्त WB Electronics, Lorenco Defence, Global Technocrats, Vijayan Trishul Defence Solutions तथा Gurutvaa Systems द्वारा यूएवी, लॉयटरिंग म्यूनिशंस, गोला-बारूद, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में निवेश किए जा रहे हैं। इन सभी निवेशों से झांसी विस्फोटक, प्रोपेलेंट, गोला-बारूद उत्पादन एवं रक्षा प्रणालियों के एकीकरण का रणनीतिक केंद्र बनता जा रहा है।

रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सिस्टम इंटीग्रेशन का समर्पित केंद्र

चित्रकूट को रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सिस्टम इंटीग्रेशन क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा लगभग ₹562.50 करोड़ के प्रस्तावित निवेश से अत्याधुनिक इंटीग्रेशन एवं टेस्टिंग सुविधा स्थापित की जा रही है। इस परियोजना से रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, संचार उपकरण, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के विकास को गति मिलेगी और इसके साथ ही सहायक उद्योगों एवं प्रौद्योगिकी आधारित कंपनियों का मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा।

क्लस्टर आधारित मॉडल से मजबूत होगा आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर द्वारा अपनाई गई क्लस्टर आधारित रणनीति के अंतर्गत कानपुर को लघु शस्त्र एवं गोला-बारूद, लखनऊ को मिसाइल एवं एयरोस्पेस प्रणालियों, अलीगढ़ को ड्रोन एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों, झांसी को विस्फोटक एवं भारी रक्षा विनिर्माण तथा चित्रकूट को रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सिस्टम इंटीग्रेशन का उत्कृष्टता केंद्र बनाया जा रहा है।

कानपुर एवं लखनऊ में प्रस्तावित रक्षा परीक्षण अवसंरचना (DTIS) सुविधाओं के सहयोग से यह कॉरिडोर डिजाइन, परीक्षण, विनिर्माण, इंटीग्रेशन एवं प्रमाणीकरण तक की एकीकृत औद्योगिक श्रृंखला स्थापित कर रहा है। यह मॉडल स्वदेशी रक्षा उत्पादन को गति देगा, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर सृजित करेगा तथा उत्तर प्रदेश को भारत के अग्रणी रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

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