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बिहार में बनेंगे 220 किमी लंबे 3 मेगा एक्सप्रेस-वे; यूपी से होगा सीधा कनेक्शन

बिहार सरकार गंगा व गंडक किनारे 220 किमी के 3 नए फोरलेन रिवरफ्रंट एक्सप्रेस-वे बनाएगी. इन परियोजनाओं से आर्थिक व औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. एक्सप्रेस-वे पीपीपी मॉडल के तहत बनाए जाएंगे.

Gaurav Dwivedi
June 6, 2026
3 min read
 बिहार में बनेंगे 220 किमी लंबे 3 मेगा एक्सप्रेस-वे; यूपी से होगा सीधा कनेक्शन

बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार ने गंगा और गंडक नदी के किनारे 220 किलोमीटर लंबे 3 नए फोरलेन रिवरफ्रंट एक्सप्रेस-वे बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को बिहार के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है. खास बात यह है कि इन परियोजनाओं को राज्य सरकार अपने स्तर पर विकसित करेगी और इसके लिए बिहार राज्य पथ विकास निगम (BSRDC) ने टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.पथ निर्माण विभाग के अनुसार परियोजना के तहत DPR तैयाक करने, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय स्वीकृतियों के लिए कंसल्टेंसी एजेंसियों का चयन किया जाएगा. चयनित एजेंसियां अगले 12 महीनों में तकनीकी अध्ययन और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगी, जिसके बाद निर्माण लागत तय कर काम शुरू किया जाएगा. परियोजनाओं को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जाएगा. पहले फोरलेन रिवरफ्रंट परियोजना का नाम विश्वामित्र पथ, दूसरे का अंबिका पथ और तीसरे का नारायणी पथ रखा गया है.बिहार को यूपी से जोड़ेगा विश्वामित्र पथ इस योजना का पहला हिस्सा विश्वामित्र पथ होगा, जिसकी लंबाई लगभग 90 किलोमीटर होगी. यह मार्ग मनेर से शुरू होकर आरा होते हुए बक्सर तक जाएगा. बक्सर में इसे यूपी के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और जनेश्वर मिश्र पुल से जोड़ा जाएगा, जिससे बिहार से लखनऊ और दिल्ली की यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगी.

अंबिका पथ से पटना में कम होगा ट्रैफिक

दूसरा गंगा अंबिका पथ, यह लगभग 56 किलोमीटर लंबा होगा, जो बिदुपुर, सोनपुर और दिघवारा को जोड़ेगा. यह मार्ग जेपी सेतु, गांधी सेतु और कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल से कनेक्ट होगा. इसके निर्माण से पटना के ट्रैफिक दबाव में कमी आएगी और प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंच भी आसान होगी.

दरिहारा से गोपालगंज को जोड़ेगा नारायणी पथ

तीसरा नारायणी पथ है. यह 74 किलोमीटर लंबा होगा, जो गंडक नदी के किनारे सोनपुर के दरिहारा से गोपालगंज के डुमरिया तक बनेगा. यह मार्ग पटना को सीधे ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जोड़ते हुए व्यापार और माल परिवहन को नई गति देगा. इससे सारण और गोपालगंज के दियारा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.

पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर

पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र ने कहा कि विकसित बिहार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य के हर क्षेत्र को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ना जरूरी है. उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि निवेश, उद्योग, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

पीपीपी मॉडल के चलते सरकार पर वित्तीय बोझ भी सीमित रहेगा. तीनों परियोजनाएं बिहार को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क और प्रमुख एक्सप्रेस-वे से जोड़कर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का काम करेंगी.

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