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बिहार टेंडर घोटाला: IAS संजीव हंस की तलाश तेज, कई बड़ी मछलियां अब भी रडार पर

बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाला मामले में विशेष निगरानी इकाई ने एक अधिकारी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. रिशु श्री से पूछताछ के आधार पर यह कार्रवाई हुई. पूछताछ के बाद भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कई परतें खुली हैं. मुमुक्षु चौधरी और तारिणी दास जैसे बड़े अधिकारी इसमें शामिल हैं. वहीं आईएएस संजीव हंस की तलाश जारी है, जो फरार चल रहे हैं.

Gaurav Dwivedi
June 11, 2026
3 min read
बिहार टेंडर घोटाला: IAS संजीव हंस की तलाश तेज, कई बड़ी मछलियां अब भी रडार पर

बिहार में सरकारी ठेकों में कमीशनखोरी, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से जुड़े बहुचर्चित टेंडर घोटाला मामले में आज यानी गुरुवार को विशेष निगरानी ने एक अधिकारी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. इस पूरे घोटाले का अहम किरदार है रिशु श्री है, जिसे पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और अब रिशु श्री से पूछताछ के आधार पर ही इस घोटाले की परतें खुल रही हैं और इसमें कई बड़ी मछलियां जाल में फंस रही हैं. रिशु श्री प्रकरण में जांच एजेंसियों ने शिकंजा और कस दिया है.विशेष निगरानी इकाई की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने बिहार की नौकरशाही और ठेकेदारी जगत में खलबली मचा दी है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, इंजीनियर तारिणी दास और इंजीनियर उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया है, जबकि फरार आईएएस संजीव हंस की तलाश तेज कर दी गई है. जांच एजेंसियों का दावा है कि ठेकेदार रिशु श्री के जरिए सरकारी ठेकों में कमीशनखोरी और प्रभाव के दम पर करोड़ों रुपये के खेल को अंजाम दिया गया.

IAS संजीव हंस समेत कई अफसरों पर एक्शन

SVU ने अब तक संजीव हंस, तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और पंकज कुमार समेत कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है. मुमुक्षु चौधरी पर आरोप है कि सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त रहते हुए उन्होंने कथित रूप से रिशु श्री की कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए कमीशन लेकर ठेके आवंटित किए. 27 मार्च 2025 को ED की छापेमारी में उनके ठिकाने से करीब 2 करोड़ रुपया बरामद हुआ था. वर्तमान में वे वित्त विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात हैं. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच जारी है.

ईडी की छापेमारी में करोड़ों रुपये नकद बरामद

वहीं संजीव हंस पर जल संसाधन, ऊर्जा और अन्य विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए रिशु श्री की कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप है. ईडी, सीबीआई और एसवीयू की अलग-अलग जांचों में उनका नाम सामने आया है. पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास भी जांच के घेरे में हैं. ईडी की छापेमारी में उनके यहां से करोड़ों रुपये नकद बरामद हुआ था.

जांच एजेंसियों को यह भी सुराग मिला है कि रिशु श्री से जुड़ी एक अतिरिक्त कंपनी के माध्यम से कथित तौर पर काले धन को सफेद करने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था. जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित भ्रष्टाचार तंत्र से किन-किन अधिकारियों, ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचा.

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