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BJP-सपा की तैयारियों के बीच मायावती का बड़ा दांव, कलह और सत्ता से दूरी के बावजूद टिकट बांटने में निकलीं आगे

उत्तर प्रदेश में चार-पांच माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सबसे आगे चल रही है। बीएसपी ने अब तक अपने 100 उम्मीदवार तय कर दिए हैं।

Gaurav Dwivedi
October 12, 2026
5 min read
BJP-सपा की तैयारियों के बीच मायावती का बड़ा दांव, कलह और सत्ता से दूरी के बावजूद टिकट बांटने में निकलीं आगे

विशेष खबर प्रस्तुति- गौरव द्विवेदी(संपादक)खबर युग (Khabar Yug) हिंदी न्यूज़ और मीडिया पोर्टल

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) अपने भविष्य को लेकर संघर्ष कर रही है। एक तरफ जहां बीएसपी के सामने यूपी के अगले विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करके अपना खोया हुआ राजनीतिक वर्चस्व फिर से हासिल करने की चुनौती है वहीं दूसरी तरफ पार्टी प्रमुख मायावती के परिवार में भी उठापटक चल रही है। मायावती के सामने बीएसपी की विरासत सौंपने के लिए परिवार के योग्य सदस्य के चयन की और पार्टी को बचाए रखने, इसे मजबूत करके आगे ले जाने की भी चुनौती है। हालांकि इन संकटों का सामना करते हुए भी बीएसपी ने विधानसभा चुनाव के लिए अब तक अपने 100 उम्मीदवारों ने नाम तय कर दिए हैं। इस मामले में वह सत्ता पक्ष और विपक्ष के अन्य दलों से काफी आगे चल रही है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने विधानसभा चुनाव के लिए सितंबर में 100 प्रत्याशी घोषित करने का अपना लक्ष्य पूरा कर लिया है। हालांकि अभी तक बीएसपी ने इन प्रत्याशियों के नामों की अधिकृत सूची जारी नहीं की है, लेकिन वह 100 सीटों के लिए नाम तय कर चुकी है। बीएसपी ने जिन उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं, उन्हें वह विधानसभा प्रत्याशी के बजाय, विधानसभा प्रभारी कह रही है। यही प्रभारी चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार होंगे।

अगले डेढ़ माह में 250 उम्मीदवार किए जाएंगे तय

बीएसपी जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलनों के आयोजन कर रही है और इसी दौरान पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर रहे हैं। बीएसपी का लक्ष्य अगले डेढ़ माह में, यानी 15 नवंबर तक पार्टी के करीब 250 प्रत्याशियों के नाम तय करने का है।

बताया जाता है कि बीएसपी अगले एक माह में जिन सीटों पर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाने हैं, उनके कार्यक्रम भी तय कर देगी। पार्टी प्रमुख मायावती लखनऊ में अपने आवास पर टिकट का चाहने वाले उम्मीदवारों से लगातार मुलाकातें कर रहीं हैं। वे टिकट के प्रत्येक दावेदार को परखने के बाद जिले में कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन करने के निर्देश दे रही हैं।

चंद्रशेखर आजाद मायावती के पीछे

बहुजन समाज पार्टी अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर रही है, नामों की सार्वजनिक घोषणा नहीं कर रही है। जबकि बाकी दलों में से सिर्फ आजाद समाज पार्टी (ASP) ही ऐसा दल है जो प्रत्याशियों के नाम तय करने के मामले में मायावती के पीछे-पीछे चल रहा है। चंद्रशेखर आजाद की इस पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए अपने 42 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। एएसपी का दावा है कि वह अब तक यूपी की कुल 87 विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवार तय कर चुकी है।

आजाद समाज पार्टी भी अपने उम्मीदवारों को फिलहाल विधानसभा सीटों के प्रभारी बता रही है। एएसपी भी इन प्रभारी को ही पार्टी का उम्मीदवार बनाएगी। चंद्रशेखर आजाद ने दलित समुदाय के सबसे ज्यादा उम्मीदवार बनाए हैं। इस समुदाय से उसने 20 उम्मीदवार घोषित किए हैं। इसके बाद ओबीसी समुदाय से 13 उम्मीदवार और मुस्लिम समुदाय से नौ उम्मीदवार बनाए हैं।

उम्मीदवारों के चयन में जुटी पार्टियां

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च, 2027 में होने की संभावना है। इस चुनाव में अब करीब चार महीने ही शेष हैं। इस चुनाव के लिए आधिकारिक रूप से किसी भी राजनीतिक दल ने अब तक अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं की है। हालांकि सभी राजनीतिक दलों में इसके लिए आंतरिक तैयारियां जारी हैं। वे उम्मीदवारों के चयन को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

सपा के 46 प्रत्याशी तय

बीएसपी और एएसपी अपने प्रभारी/प्रत्याशियों के नाम घोषित कर रही हैं, लेकिन बाकी दल फिलहाल इसके लिए मंथन में जुटे हैं। बताया जाता है कि समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए करीब 46 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम अंदरूनी तौर पर तय कर दिए हैं। इन सीटों में यूपी के पूर्वांचल, पश्चिम और मध्य यूपी की सीटें शामिल हैं। सपा के इन उम्मीदवारों की पहली आधिकारिक लिस्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।

सपा-कांग्रेस गठबंधन अटका

चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन का मामला फिलहाल अटका हुआ है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर तनातनी चल रही है। बताया जाता है कि कांग्रेस 150 से 200 सीटों की मांग कर रही है। बताया जाता है कि सपा कांग्रेस को इतनी सीटें देने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि सपा और कांग्रेस के लिए गठबंधन करना मजबूरी है। वे दोनों अलग-अलग चुनाव लड़कर सफल नहीं हो सकती हैं। ऐसे में आसार यही हैं कि सपा और कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की घोषणा चुनाव सिर पर आने के बाद ही करें।

बीजेपी में प्रत्याशियों के चयन की बड़ी कवायद

सत्ता पक्ष बीजेपी और उसके एनडीए गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच भी सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान चल रही है। इस बीच बीजेपी के बिहार में सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने भी उत्तर प्रदेश में 60 सीटों पर चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर कर दी है। ऐसे में बीजेपी को सहयोगियों के साथ काफी मोलभाव करना पड़ सकता है। हालांकि बीजेपी का होमवर्क लगातार चल रहा है। वह भले ही उम्मीदवारों की घोषणा देर से करे, लेकिन हर प्रत्याशी के पीछे उसका कई स्तरों पर किया गया सर्वे होगा।

बीएसपी के लिए अस्तित्व की लड़ाई

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं। मायावती इनमें से करीब एक चौथाई (100) सीटों के लिए उम्मीदवार निर्धारित कर चुकी हैं। चुनाव से पांच माह पहले उम्मीदवार तय करने से इन सौ सीटों पर घोषित प्रभारियों को क्षेत्र में जमीनी तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया है। यूपी में बीएसपी का फिलहाल न तो कोई विधायक है, न एमएलसी है। संसद के दोनों सदन भी बीएसपी विहीन हैं। ऐसे में यूपी का अगला चुनाव बीएसपी के लिए अस्तित्व की लड़ाई है। मायावती अब पार्टी को बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

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