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पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने बनाई ‘जननीति भारत’ पार्टी, लड़ेंगी चुनाव

UP चुनाव से पहले पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने जननीति भारत नाम से पार्टी बना ली है. उन्होंने यूपी में चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया है.

Gaurav Dwivedi
October 15, 2026
3 min read
पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने बनाई ‘जननीति भारत’ पार्टी, लड़ेंगी चुनाव

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक और पार्टी का जन्म हो गया है. मिर्जापुर की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीतिक पार्टी जननीति बनाने का ऐलान किया है. इसके साथ ही यूपी में विधानसभा का चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. इससे पहले दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया था कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय जनता के मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू करेंगी.दिव्या मित्तल ने कहा कि उनकी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी. उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो संदेश में पार्टी के विचार और तीन प्रमुख प्राथमिकताओं को सामने रखा. उनका कहना है कि राजनीति में समस्या राजनीतिक दलों की कमी नहीं, बल्कि जनता की बात सुनने की कमी है.दिव्या मित्तल ने कहा कि सरकार की नीतियां बनाने में आम लोगों की भागीदारी होनी चाहिए… सरकार केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि अपने पूरे कार्यकाल में जनता के प्रति जवाबदेह रहे. उनकी पार्टी का उद्देश्य लोगों को नीति-निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ना और सरकारी योजनाओं तथा विकास कार्यों की निगरानी को आसान बनाना है.

क्या हैं जन नीति भारत पार्टी की तीन प्राथमिकताएं?

1. दिव्या मित्तल की पहली प्राथमिकता है कि सरकारी नीतियों के केंद्र में आम जनता हो. उनके मुताबिक, लोगों को अपनी समस्याओं और जरूरतों की जानकारी सबसे बेहतर होती है, इसलिए नीति बनाने से पहले उनकी बात सुनी जानी चाहिए. जनता अपनी जरूरत बताए और विशेषज्ञ उन समस्याओं के समाधान का रास्ता तैयार करें.

2. दिव्या मित्तल की दूसरी प्राथमिकता है कि सरकारी फैसले लोगों की जरूरतों के आधार पर हों. उन्होंने कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में समानता होनी चाहिए और किसी व्यक्ति की पहचान के बजाय उसकी वास्तविक जरूरत को महत्व दिया जाना चाहिए. उनका जोर ऐसी व्यवस्था पर है जिसमें जनता की समस्याओं को सुना जाए और सरकारी निर्णयों का आधार उन समस्याओं का समाधान हो.

3. दिव्या मित्तल की तीसरी प्राथमिकता सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक कार्यों की निगरानी को पारदर्शी बनाना है. उन्होंने कहा कि कई बार लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि उनकी अर्जी किस स्थिति में है या उनके इलाके में स्वीकृत विकास कार्य कितना आगे बढ़ा है. ऐसी स्थिति में बिचौलियों के जरिए लोगों से पैसे मांगने की गुंजाइश बनती है.

उन्होंने प्रस्ताव दिया कि सरकारी योजनाओं में आवेदन की स्थिति लोगों को सीधे उनके मोबाइल फोन पर उपलब्ध होनी चाहिए. गांवों में सड़क, नाली, हैंडपंप और दूसरे सार्वजनिक कार्यों की जानकारी भी डिजिटल नक्शे पर दिखाई जा सकती है. इसमें काम की प्रगति, पूरा होने की संभावित समयसीमा और जिम्मेदार अधिकारियों का विवरण शामिल हो.

IAS की नौकरी छोड़कर राजनीति में आईं दिव्या मित्तल

दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं. उन्होंने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था, जिसे सितंबर 2026 में स्वीकार कर लिया गया. उत्तर प्रदेश में उन्होंने मेरठ, गोंडा, संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में अलग-अलग प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं. मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए दूर-दराज के गांव लहुरिया दह तक पाइप से पानी पहुंचाने की पहल को लेकर भी वह चर्चा में रही थीं.

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