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NEET पेपर लीक से पहले ‘स्पेशल क्लास’, WhatsApp पर सवाल… CBI ने खोली पूरी साजिश

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट में कई बड़े दावे किए गए हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक WhatsApp-Telegram ग्रुप और लाखों रुपये के लेनदेन के जरिए परीक्षा से पहले सवाल छात्रों तक पहुंचाए गए.

Gaurav Dwivedi
August 7, 2026
5 min read
NEET पेपर लीक से पहले ‘स्पेशल क्लास’, WhatsApp पर सवाल… CBI ने खोली पूरी साजिश

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट से कई बड़े खुलासे सामने आए हैं. जांच एजेंसी का दावा है कि परीक्षा से तीन दिन पहले ही सवाल लीक हो गए थे और उन्हें WhatsApp, Telegram और ऑफलाइन क्लासों के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया. CBI के मुताबिक इस पूरे मामले में NTA से जुड़े कुछ विषय विशेषज्ञ, कोचिंग सेंटर संचालक, बिचौलिए और कई अन्य लोग शामिल थे.CBI के अनुसार, केमिस्ट्री के विषय विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी ने गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद 25 से 27 अप्रैल के बीच पुणे में “स्पेशल क्लास” चलाई. इन क्लासों में शामिल छात्रों को कथित तौर पर वही सवाल और जवाब लिखवाए गए जो बाद में NEET परीक्षा में आए. लातूर में भी कुछ छात्रों को इसी तरह की विशेष क्लास दी गई.जांच में “माय गेट” ऐप के रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से यह पुष्टि होने का दावा किया गया है कि छात्र कुलकर्णी के घर पहुंचे थे. छात्रों की नोटबुक में लिखे सवाल और CBI के अनुसार लीक हुए पेपर आपस में मेल खाते हैं. कुलकर्णी के मोबाइल से केमिस्ट्री के सवालों की तस्वीरें, उम्मीदवारों और उनके माता-पिता से बातचीत और कई अहम डिजिटल सबूत मिलने का भी दावा किया गया है.

WhatsApp के जरिए भेजे गए सवाल

CBI का कहना है कि परीक्षा के बाद एक अभिभावक ने कुलकर्णी से संपर्क कर उन्हें घड़ी गिफ्ट करने की इच्छा भी जताई थी, क्योंकि परीक्षा में वही सवाल आने का दावा किया गया था. जांच में यह भी सामने आया कि कुलकर्णी ने फिजिक्स का पेपर हासिल करने की भी कोशिश की थी.

फिजिक्स विषय की विशेषज्ञ मनीषा हवालदार पर आरोप है कि उन्होंने गोपनीयता की शपथ के बावजूद 25 हजार रुपये लेकर फिजिक्स के सवाल लीक किए. जांच के अनुसार परीक्षा से आठ दिन पहले उनके मोबाइल में हाथ से लिखे सवाल मौजूद थे. उन्होंने ये सवाल दूसरे आरोपी तेजस शाह को लिखवाए, जिसने उन्हें आगे पहुंचाने का काम किया.

CBI के मुताबिक मनीषा वाघमारे पूरे नेटवर्क में छात्रों और विषय विशेषज्ञों के बीच कड़ी का काम कर रही थीं. उन्होंने अभिभावकों से चार लाख रुपये तक लेकर छात्रों को ऑफलाइन क्लास में भेजा, पैसे इकट्ठा किए और बाद में WhatsApp के जरिए फिजिक्स के सवाल भी भेजे. आरोप है कि अगर वही सवाल परीक्षा में आते तो अतिरिक्त 50 हजार रुपये की मांग भी की गई.

“FIFA World Cup 2026” नाम के बनाए गए ग्रुप

वहीं, मनीषा गुरुनाथ मंडारे पर आरोप है कि उन्होंने अपने घर पर बायोलॉजी की क्लास लगाई. छात्रों को नई NCERT किताबों में खास पैराग्राफ चिन्हित करवाए और सवाल लिखवाए. बाद में उन्होंने फिजिक्स के लीक सवालों की कॉपी भी हासिल की.

CBI के अनुसार राजस्थान के सीकर में संचालित एक कोचिंग नेटवर्क के जरिए भी लीक पेपर बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंचाया गया. आरोप है कि 2 मई की रात परीक्षा से पहले PDF फाइल 40 से 50 छात्रों के बीच बांटी गई. एक कोचिंग संचालक ने इसे “सबसे संभावित प्रश्नपत्र” बताकर छात्रों में फैलाया. परीक्षा के बाद छात्रों ने वीडियो बनाकर दावा किया कि वही सवाल परीक्षा में आए.

जांच में कई WhatsApp ग्रुप भी सामने आए हैं. इनमें “NEET 2026” और “FIFA World Cup 2026” नाम के ग्रुप शामिल हैं, जिनके जरिए कथित तौर पर सवाल और अन्य जानकारी साझा की गई. CBI का कहना है कि आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए कोड नामों का भी इस्तेमाल किया. NTA के मास्टर सेट के लिए “कैलाश” और “शिवालिक” जैसे कोड नाम थे, जबकि एक आरोपी ने अपने साथी का नंबर “AP Broker” नाम से सेव कर रखा था.

NTA एक्सपर्ट से कोचिंग नेटवर्क तक खुली परतें

चार्जशीट के मुताबिक पेपर लीक की साजिश परीक्षा से काफी पहले शुरू हो चुकी थी. अक्टूबर 2025 से ही छात्रों और अभिभावकों से संपर्क किया गया और किस्तों में लाखों रुपये लिए गए. कुछ मामलों में नकद और कुछ में ऑनलाइन भुगतान किया गया.

CBI ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं. जांच एजेंसी के अनुसार प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद की प्रक्रिया के दौरान एक ही विशेषज्ञ को चारों मास्टर सेट देखने का मौका मिलता था. विशेषज्ञों की ठीक से तलाशी नहीं होती थी और पूरे परिसर की निगरानी के लिए अलग कंट्रोल रूम भी नहीं था. इसी कमजोरी का फायदा उठाकर सवाल बाहर ले जाए गए.जांच में दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की रिपोर्ट का भी जिक्र है. रिपोर्ट के अनुसार बायोलॉजी के लीक सवालों का आधिकारिक प्रश्नपत्र से 90 प्रतिशत तक और केमिस्ट्री के कई सेटों में लगभग 100 प्रतिशत तक मिलान पाया गया. इससे CBI का दावा और मजबूत हुआ है कि लीक हुए सवाल असली प्रश्नपत्र से जुड़े थे.

CBI का कहना है कि 3 मई 2026 को परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद सीकर के एक केमिस्ट्री शिक्षक ने लीक PDF और असली प्रश्नपत्र का मिलान किया. सवालों के मेल खाने के बाद उन्होंने NTA के महानिदेशक को ईमेल भेजा। इसके बाद इस पूरे मामले की बड़ी जांच शुरू हुई. फिलहाल दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में CBI की चार्जशीट पर सुनवाई चल रही है. अदालत अब यह तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ किन धाराओं में संज्ञान लिया जाए और आगे मुकदमे की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी.

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