स्पेशल स्टोरी

वाराणसी में 116 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, मुख्य आरोपी समेत 4 गिरफ्तार

वाराणसी में साइबर क्राइम सेल ने 116.86 करोड़ की बड़ी साइबर ठगी का खुलासा किया है. गैंग के सरगना नीतीश कुमार पाण्डेय समेत चार लोग गिरफ्तार हुए हैं.

Gaurav Dwivedi
August 23, 2026
3 min read
वाराणसी में 116 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, मुख्य आरोपी समेत 4 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. साइबर क्राइम सेल और थाना चेतगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर फर्म और बैंक खाते खुलवाता था. इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और बेटिंग एप से जुड़ी रकम के लेनदेन में किया जाता था. पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है.पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के रोहतास जिले के सासाराम निवासी नीतीश कुमार पाण्डेय भी शामिल है, जिसे गिरोह का सरगना बताया जा रहा है. जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े 41 बैंक खातों की जानकारी सामने आई. इन खातों के संबंध में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर कुल 143 शिकायतें दर्ज मिलीं. शिकायतों की जांच में करीब 116.86 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी का पता चला है.

कमीशन का लालच देकर बनाते थे शिकार

पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य लोगों को कमीशन देने का लालच देकर उनके नाम पर फर्म और बैंक खाते खुलवाते थे. इसके बाद इन खातों की बैंकिंग डिटेल और अन्य जरूरी जानकारी अपने कब्जे में लेकर साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था. इस तरह ठगी की रकम को कई स्तरों पर घुमाकर उसके असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की जाती थी.

XePay APK से OTP हासिल करने का आरोप

पुलिस के अनुसार आरोपी XePay APK का इस्तेमाल कर मोबाइल में SMS Forwarding सक्रिय करते थे. इसके जरिए बैंकिंग लेनदेन से संबंधित OTP और अन्य संदेश हासिल किए जाते थे. इसके बाद इन जानकारियों का इस्तेमाल ठगी की रकम को ट्रांसफर करने में किया जाता था. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और खातों की भी जानकारी जुटा रही है.

भारी मात्रा में सामान बरामद

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने सात मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 19 चेकबुक, 40 डेबिट कार्ड और 48 QR स्कैनर बरामद किए हैं. इसके अलावा दो वाहन भी पुलिस के हाथ लगे हैं. बरामद सामान की जांच की जा रही है, ताकि साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य मामलों का पता लगाया जा सके.

पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने कितने लोगों के नाम पर खाते और फर्म खुलवाई थीं और देश के किन-किन हिस्सों में साइबर ठगी की रकम भेजी गई. साथ ही बेटिंग एप और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड से जुड़े लेनदेन की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और ठगी की रकम के संबंध में और खुलासे हो सकते हैं.

इस खबर को लाइक और शेयर करें

Comments (0)

0/2000 characters

Facebook टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए Facebook में लॉगिन करें

टिप्पणियां अक्षम हैं। व्यवस्थापक से संपर्क करें।

Related Stories

जब स्कूल का हिसाब आज भी रजिस्टर में चलता है, तब डिजिटल होने का मतलब क्या है?

छोटे शहरों के स्कूलों में आज भी फीस का हिसाब-किताब कई जगह रजिस्टर, calculator और हाथ से बनी receipts के सहारे चलता है। VidhyaPe इसी ground reality से निकली एक कोशिश है—ऐसी technology बनाने की, जिसे वर्षों से register पर काम कर रहा accountant भी बिना झिझक अपना सके।

'हिंदू जागेंगे तो दुनिया जागेगी', कनाडा में बोले मोहन भागवत- सबकी मदद करना भारत का DNA

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के बाद कनाडा दौरे पर पहुंचे हैं। कनाडा के टोरंटो में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कई बातें कही हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू के भरोसेमंद मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल का इस्तीफा, विदाई के पीछे की कहानी क्या? साये की तरह रहते थे साथ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी के रूप में चर्चित मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने भारतीय सेना से समय से पहले इस्तीफा दे दिया है। वह 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज के अधिकारी रह चुके हैं। ऋषभ सिंह सांब्याल ने इस्तीफे का कारण भी बताया है।

हापुड़ में स्वाइन फ्लू से पहली मौत, चार नए केस मिले, मेरठ मेडिकल में 20 बेड का वार्ड तैयार

स्‍वाइन फ्लू की वजह से लखनऊ में एक मरीज की मौत हो चुकी है। हापुड़ के शख्‍स की भी नोएडा के अस्‍पताल में मौत हो गई। इसके अलावा चार अन्‍य मरीज मिले हैं।