स्वाइन फ्लू तेजी से फैल रहा, मां-बेटे समेत तीन नए मरीज, संख्या 7 पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
मेरठ में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। एसपी सिटी विनायक गोपाल भौंसले भी इस संक्रमण का शिकार हो चुके हैं।

मेरठ: मेरठ में स्वाइन फ्लू का संक्रमण तेजी से पैर पसारता नजर आ रहा है। मां-बेटे समेत तीन नए मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। इसके साथ ही जिले में अब तक सामने आए संक्रमित मरीजों की संख्या सात पहुंच गई है। लगातार नए मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। संक्रमण को देखते हुए मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में मरीजों के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, मेरठ एसपी सिटी विनायक गोपाल भौंसले भी इस संक्रमण का शिकार हो चुके है।
स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की रोकथाम के लिए निगरानी बढ़ाने के साथ ही उपचार की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। सीएमओ डॉ. रामप्रसाद ने बताया कि स्वाइन फ्लू से बचाव और इलाज के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है। मरीजों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली टेमी फ्लू दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी करेंगी।
विशेष स्वास्थ्य शिविर लगेंगे
नोडल अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार के अनुसार, मलिन बस्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में लोगों की जांच कर फ्लू जैसे लक्षण मिलने पर आवश्यक उपचार और चिकित्सकीय सलाह दी जाएगी। विभाग का फोकस शुरुआती स्तर पर मरीजों की पहचान कर संक्रमण को फैलने से रोकने पर है।
श्वसन तंत्र पर सीधा असर करता है वायरस, क्या होते है लक्षण
वरिष्ठ फिजिशियन पूर्व IMA अध्यक्ष डॉ.तनुराज सिरोही ने बताया कि स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है। यह ए टाइप इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होता है, जिसे एच1एन1 वायरस के नाम से जाना जाता है। वायरस में समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं, लगातार नाक बहना, छींक आना, नाक बंद होना और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। फ्लू जैसे लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। वहीं, मेरठ में सभी वरिष्ठ फिजिशियन डॉक्टरों के यहां बुखार, ओर नाक गले में खराश की शिकायत वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
मेडिकल में जांच से लेकर इलाज तक इंतजाम
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि अस्पताल में स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए अलग वार्ड की सुविधा उपलब्ध है। वार्ड में वेंटिलेटर समेत उपचार के जरूरी संसाधन, दवाएं और मास्क उपलब्ध हैं। एच1एन1 की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में भी व्यवस्था है। नए मरीजों के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्थाओं की समीक्षा तेज कर दी है।
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