‘7 लाख दो, सरकारी नौकरी पाओ…’, फर्जी IAS विप्रा शर्मा गैंग का पर्दाफाश, यूनिवर्सिटी क्लर्क भी था ठगी में शामिल
बरेली में आईएएस अधिकारी बताकर सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी की गई. विप्रा शर्मा और उसके गैंग ने बेरोजगारों को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर लूटा. अब इसमें एक क्लर्क देवप्रकाश का नाम भी सामने आया है.

उत्तर प्रदेश के बरेली में खुद को आईएएस अधिकारी बताकर बेरोजगारों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करोड़ो रुपये की ठगी करने वाले गैंग की परतें अब लगातार खुल रही हैं. गैंग की मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा और उसकी बहन के बारे में पुलिस पहले ही कार्रवाई कर चुकी है. आरोप है कि दोनों बहनें खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों को सरकारी नौकरी का भरोसा देती थीं. लोगों पर रौब जमाने के लिए लग्जरी कार पर नीली बत्ती लगाकर चलने और खुद को बड़ा अधिकारी बताने का भी आरोप सामने आया था.पुलिस दोनों बहनों को कई महीने पहले जेल भेज चुकी है और गैंग से जुड़ी संपत्तियों को भी चिह्नित किया जा चुका है. अब इस मामले में नया खुलासा रुहेलखंड विश्वविद्यालय से जुड़ा है. विश्वविद्यालय में क्लर्क के पद पर तैनात देवप्रकाश का नाम भी ठगी के एक मामले में सामने आया है. बारादरी थाने में उसके खिलाफ दोबारा रिपोर्ट दर्ज हुई है. आरोप है कि देवप्रकाश छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को विप्रा तक पहुंचाने और नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाने में मदद करता था.
क्लर्क ने कहा- विप्रा से संपर्क है, नौकरी लगवा देंगी
शाहजहांपुर निवासी पुष्पेंद्र ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध पुवायां के एक महाविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की थी. पढ़ाई के दौरान उनकी पहचान विश्वविद्यालय के क्लर्क देवप्रकाश से हुई. आरोप है कि देवप्रकाश ने बताया कि उसका विप्रा शर्मा से संपर्क है और वह सरकारी नौकरी लगवा सकती हैं. नौकरी न लगने पर रकम वापस कराने का भरोसा भी दिया गया.
इसके बाद देवप्रकाश के साथ पुष्पेंद्र गोल्डन ग्रीन पार्क स्थित विप्रा के घर पहुंचे. आरोप है कि यहां राजस्व विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे सात लाख रुपये ले लिए गए. काफी समय बाद भी नौकरी नहीं लगी तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ. जांच के दौरान पता चला कि विप्रा के नाम से पहले भी सरकारी नौकरी के नाम पर कई लोगों से रकम लेने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं.
फर्जी नियुक्ति पत्र देकर भेज देते थे नौकरी करने
संजय नगर निवासी अरविंद कुमार ने भी विप्रा के खिलाफ बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है. अरविंद के मुताबिक उनकी विप्रा से पहचान एक कपड़े की दुकान पर हुई थी. आरोप है कि विप्रा ने फोन कर उन्हें गोल्डन ग्रीन पार्क स्थित घर बुलाया और सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा देकर चार लाख रुपये लिए. इसके बाद उन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया.
अरविंद जब नियुक्ति पत्र लेकर शाहजहांपुर पहुंचे तो वहां पहुंचने पर फर्जीवाड़े का पता चला. इसी तरह पुलिस के सामने आए मामलों में आरोप है कि गैंग पहले बेरोजगार युवाओं को अपने प्रभाव में लेता था. खुद को आईएएस अधिकारी बताकर सरकारी विभाग में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया जाता था. नौकरी के पद के हिसाब से लाखों रुपये मांगे जाते थे. रकम मिलने के बाद फर्जी नियुक्ति पत्र देकर पीड़ित को संबंधित विभाग में भेज दिया जाता था.
पुलिस ने संपत्तियां चिह्नित कीं, अब नए नाम सामने आ रहे
विप्रा शर्मा के खिलाफ अलग-अलग थानों में लगातार मुकदमे दर्ज होते रहे हैं. पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके साथ जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आई. गैंग से जुड़ी संपत्तियों को चिह्नित करने की कार्रवाई भी की गई है. पुलिस का कहना है कि ठगी से अर्जित संपत्ति के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले में अब तक 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं. अलग-अलग मामलों में विप्रा, उसके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम सामने आए हैं. कई आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं. पुलिस की जांच अभी जारी है और नए पीड़ितों की शिकायतें सामने आने के साथ गैंग से जुड़े नए लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं.
अब रुहेलखंड विश्वविद्यालय के क्लर्क देवप्रकाश का नाम सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है. आरोप है कि उसके खिलाफ पहले भी रिपोर्ट दर्ज हुई थी, इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. उसे कृषि संकाय में भेजे जाने की बात सामने आई है. वहीं एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि विप्रा गैंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है.
नए मामलों में सामने आ रहे आरोपियों की भूमिका की जांच हो रही है. किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा. ठगी से अर्जित संपत्तियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
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