देवेंद्र नाथ महतो: हजारीबाग से इस बीएड पास ने हिला दी JPSC की 'दीवार', लड़ने की आदत से टिका है झारखंड का यह वांगचुक
आंदोलन के अगुवा देवेंद्र नाथ महतो बीते कई दिनों से सरकारी भर्ती परीक्षाओं में धांधली को लेकर भूख हड़ताल पर हैं।

रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर हो रहे बढ़ते छात्र विरोध का केंद्र रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम बन गया है। इस आंदोलन के केंद्र में रांची सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती झारखंड के 35 वर्षीय छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो हैं, जिन्होंने 2 अगस्त को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। प्रदर्शनकारी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। साथ ही वे परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई की भी मांग कर रहे हैं। 15 अगस्त को एक नया विवाद तब खड़ा हो गया, जब महतो को तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया है कि तिरंगा यात्रा और ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने की इच्छा जताने के बाद उनके कमरे के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलनकारी छात्रों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लड़ने और जूझने की इसी आदत के चलते झारखंड का यह सोनम वांगचुक अभी तक इस आंदोलन में टिका हुआ है।
देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं, जिन्होंने पूछा-क्या यही आजादी है
रांची के कापीडीह गांव के रहने वाले 35 साल के महतो झारखंड के एक छात्र नेता हैं जो कई सालों से छात्र आंदोलन से जुड़े रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में महतो ने रांची सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।
2024 में दिए गए चुनाव हलफनामे के अनुसार, उस वक्त 33 साल के महतो ने 2018 से 2020 के बीच रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (DSPMU) से पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।
महतो के पास संस्कृत और कुड़माली में पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री है और उन्होंने हजारीबाग से बीएड भी किया है। उसी साल बाद में, उन्होंने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के टिकट पर सिल्ली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा।
15 अगस्त, 2026 को ध्वाजरोहण कार्यक्रम में देवेंद्र महतो जाना चाहते थे, मगर झारखंड सरकार की पुलिस ने उन्हें जाने नहीं दिया और रोके रखा। इस पर रविवार को महतो ने एक्स पर सरकार से सवाल कर पूछा है-क्या यही आजादी है, जिसके लिए भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, महात्मा गांधी और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संघर्ष किया था?
देवेंद्र महतो ने कई बार पुलिस की लाठियां खाईं
महतो लंबे समय से छात्र आंदोलनों में एक्टिव रहे हैं। कई बार उन्होंने पुलिस की लाठियां खाई हैं। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। फरवरी, 2024 में महतो JSSC-CJL प्रश्नपत्र लीक विवाद में हुए आंदोलन में अगुवा रहे।
देवेंद्र नाथ महतो ने बीते साल यानी फरवरी, 2025 में महतो ने क्षेत्रीय अधिकार और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांके प्रखंड-अंचल कार्यालय का घेराव भी किया था।
महतो की सोनम वांगचुक से हो रही तुलना
देवेंद्र नाथ महतो को ‘झारखंड का सोनम वांगचुक' भी कहा जा रहा है। इसकी पीछे की बड़ी वजह उनका अनशन और सत्याग्रह का तरीका है।
लद्दाख के शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी जनहित और अधिकारों के सवाल पर लंबे समय तक अनशन किया था।
इसी तरह देवेंद्र नाथ महतो भी अहिंसात्मक आंदोलन के जरिए झारखंड के प्रतियोगी छात्रों की मांगों को उठा रहे हैं। भूख हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर सोनम वांगचुक ने उनसे वीडियो संवाद भी किया था।
महतो का छात्र आंदोलनों का इतिहास
देवेंद्र महतो के भर्ती परीक्षाओं को लेकर अधिकारियों के साथ टकराव यह कोई पहला मामला नहीं है। दिसंबर 2024 में, JSSC कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्र प्रदर्शनकारियों में वे भी शामिल थे।
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसके बाद महतो को हिरासत में ले लिया गया।
इस घटना ने झारखंड के छात्र आंदोलनों के एक प्रमुख चेहरे के तौर पर उनकी पहचान को और मजबूत किया।
मौजूदा विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कैसे हुई?
वर्तमान आंदोलन जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं से संबंधित आरोपों पर केंद्रित है। महतो और अन्य प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद आंदोलन ने गति पकड़ी।
इसके बाद छात्रों ने प्रदर्शन किए और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित राज्य अधिकारियों से मुलाकात की मांग की। विरोध प्रदर्शन बाद में रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में स्थानांतरित हो गया।
देवेंद्र महतो क्या मांग कर रहे हैं?
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने कई मांगें रखी हैं। इनमें उन परीक्षाओं को रद्द करना शामिल है जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही स्वतंत्र जांच, भर्ती प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता और गड़बड़ी साबित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी शामिल है।
सबसे अहम मांग है कि कथित गड़बड़ियों की CBI से जांच करवाई जाए। छात्रों ने कैटेगरी के हिसाब से कट-ऑफ, OMR शीट और रिस्पॉन्स शीट, और भर्ती का एक ऐसा कैलेंडर भी मांगा है जिसके बारे में पहले से पता हो।
झारखंड सरकार ने क्या पेशकश की है?
सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है, लेकिन अब तक इस गतिरोध को खत्म करने में कामयाबी नहीं मिली है।
मौजूदा खबरों के मुताबिक, राज्य सरकार तीन JPSC परीक्षाएं रद्द करने पर सहमत हो गई है।
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