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भारत में जल्द आ सकता है प्लास्टिक का नोट! RBI कर रहा है बड़ी तैयारी

RBI देश में प्लास्टिक करेंसी नोट शुरू करने पर विचार कर रहा है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है. प्लास्टिक नोटों की चर्चा पहली बार करीब 10 साल पहले हुई थी, लेकिन तकनीकी और संचालन संबंधी चुनौतियों के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी.

Gaurav Dwivedi
June 5, 2026
3 min read
भारत में जल्द आ सकता है प्लास्टिक का नोट! RBI कर रहा है बड़ी तैयारी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों की लगातार बढ़ती मांग और छपाई पर होने वाले भारी-भरकम सरकारी खर्च को कम करने के लिए एक युगांतकारी कदम उठाने की तैयारी में है। केंद्रीय बैंक अब पारंपरिक कागजी नोटों के स्थान पर अत्यधिक टिकाऊ और लागत-प्रभावी प्लास्टिक (पॉलीमर) नोट छापने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।हालांकि, रिपोर्ट्स की मानें तो इस संबंध में जल्द ही एक पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा की जा सकती है. शुरुआती दौर में 10 रुपये और 20 रुपये के नोट चुने जा सकते हैं, क्योंकि ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं.

क्यों लाए जा रहे प्लास्टिक नोट?

RBI प्लास्टिक नोटों को अपनाने पर इसलिए विचार कर रहा है क्योंकि कागज के नोटों की छपाई और रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा है. आरबीआई की FY25 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, नोट छापने की लागत बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि FY24 में यह 5,101.4 करोड़ रुपये थी. हालांकि पॉलिमर नोटों को तैयार करने की शुरुआती लागत ज्यादा होती है, लेकिन ये कागज के नोटों की तुलना में कहीं ज्यादा टिकाऊ होते हैं. इससे लंबे समय में नए नोट छापने की जरूरत कम होगी और खर्च में भी बड़ी बचत हो सकती है. इसके अलावा, देश के ATM और कैश मैनेजमेंट सिस्टम अब इतने आधुनिक हो चुके हैं कि वे पॉलिमर नोटों को आसानी से पहचान और प्रोसेस कर सकते हैं.

खराब और फटे नोट बड़ी चुनौती

RBI के सामने खराब और फटे नोटों को बदलना भी एक बड़ी चुनौती है. FY25 के दौरान करीब 23.8 अरब पुराने और खराब नोटों को चलन से बाहर किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.3 फीसदी ज्यादा है. इनमें सबसे ज्यादा 500 रुपये के नोट शामिल थे. डिजिटल भुगतान में तेजी आने के बावजूद देश में नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है और 15 मई तक चलन में कुल मुद्रा 42.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. ऐसे में पॉलिमर नोट ज्यादा समय तक सुरक्षित और उपयोगी बने रहेंगे, जिससे नोट बदलने और दोबारा छापने का दबाव काफी कम हो सकता है.

10 साल पहले भी हुई थी चर्चा

यह पहला मौका नहीं है जब देश में प्लास्टिक के नोटों की चर्चा हो रही है. करीब 10 साल पहले भी RBI ने प्लास्टिक नोट छापने का सुझाव दिया था. कागज के नोटों की छपाई पर बढ़ते खर्च और बड़ी संख्या में पुराने नोटों के खराब होकर नष्ट होने की वजह से यह योजना फिर चर्चा में आई है.

फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का परीक्षण किया जाएगा. इसके लिए देश के पांच अलग-अलग जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों वाले शहर चुने गए थे. इनमें कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर शामिल थे. हालांकि, उस समय तकनीकी और संचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस योजना को रोक दिया गया था. अब RBI एक बार फिर प्लास्टिक नोटों को लेकर संभावनाएं तलाश रहा है.

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