लखनऊ: हिंद मेडिकल ट्रस्ट में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा, फर्जी डीड और 35 फर्जी खातों से 96 करोड़ का गबन
हिंद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने पूर्व अध्यक्ष डॉ. आमोद सचान पर 96 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि फर्जी दस्तावेजों से 35 बैंक खाते खोलकर करोड़ों रुपये का गबन किया गया है।

लखनऊ: राजधानी लखनऊ में शनिवार को हिंद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आमोद कुमार सचान और उनकी पत्नी डॉ. रिचा मिश्रा पर 96 करोड़ रुपये के भारी वित्तीय घोटाले और आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए बड़ा खुलासा किया है। हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डायरेक्टर पटेल मानवेंद्र सिंह ने मीडिया के सामने पुलिस जांच की प्रगति आख्या पेश करते हुए बताया कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे खोले गए लगभग 35 संदिग्ध बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये का गबन किया गया है। ट्रस्टियों ने मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और गबन की गई रकम की तत्काल रिकवरी की मांग की है।
डायरेक्टर पटेल मानवेंद्र सिंह ने बताया कि साल 2004 में बने ट्रस्ट की मूल डीड में वर्ष 2016 के दौरान जालसाजी की गई। उन्होंने बताया कि पूर्व अध्यक्ष डॉ. आमोद सचान ने अन्य सभी संस्थापक सदस्यों के नाम अवैध रूप से हटाकर सिर्फ अपना और अपनी पत्नी का नाम दर्ज करा लिया। इसी जाली दस्तावेज के आधार पर विभिन्न बैंकों में 35 से अधिक खाते खोले गए और करोड़ों रुपये की ओवरड्राफ्ट लिमिट व बैंक गारंटी ली गई। जांच अधिकारी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि ट्रस्ट और कॉलेजों की करीब 96 करोड़ रुपये की धनराशि को 'एडोम्स फार्मास्यूटिकल्स' जैसी निजी कंपनियों और व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर कर भारी हेरफेर की गई है।
बैंक अधिकारी को धमकाने पर दूसरी FIR
ट्रस्टियों ने आरोप लगाया कि बाराबंकी और अटरिया स्थित हिंद मेडिकल कॉलेजों से होने वाली दैनिक आय का भी जमकर दुरुपयोग किया गया। कई खातों के फ्रीज होने के बावजूद कॉलेजों की आमदनी को खुर्द-बुर्द करने का खेल जारी रहा। इतना ही नहीं, जब आरबीएल बैंक के शाखा प्रबंधक ने फर्जी खातों से अवैध लेन-देन पर रोक लगाई, तो डॉ. सचान ने उन्हें खुलेआम धमकाया, जिस पर गाजीपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। इसके अलावा कॉलेज परिसर में अन्य ट्रस्टियों के साथ मारपीट के प्रयास की घटनाएं भी सामने आई हैं।
ट्रस्टियों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
संस्थापक सदस्यों ने स्पष्ट किया कि वित्तीय अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के कारण शासन ने डॉ. सचान को पहले ही केजीएमयू के विभागाध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया था और ट्रस्ट ने भी उन्हें अध्यक्ष पद से निष्कासित कर दिया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) उनकी आय से अधिक संपत्ति की जांच कर रहा है, जबकि आवास विकास परिषद ने इंदिरानगर स्थित उनके अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने का नोटिस जारी किया है। प्रेसवार्ता में ट्रस्टियों ने शासन और पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष व त्वरित जांच कर गबन की धनराशि वापस दिलाने की मांग की।
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