'ब्राह्मणों को देंगे टिकट और सत्ता में भागीदारी', अंटू मिश्रा को BSP से निकालने के बाद मायावती का बड़ा संदेश
मायावती ने पार्टी से निकाले गए नेताओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी से ऊपर कोई नहीं है। साथ ही मायावती ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के संविधान पर चलने की बात फिर दोहराई।

लखनऊ:
उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 को लेकर सभी पार्टियां अपनी-अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं। बहुजन समाज पार्टी इस बार कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। साथ ही भीतरघात करने वालों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। मायावती ने गुरुवार को अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अन्टू मिश्रा को पार्टी से बाहर कर दिया। उनको पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पार्टी से निष्कासित किया गया। इससे पहले आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ और रणधीर सिंह बेनीवाल को पार्टी से निकाला था। अब मायावती ने इस पर अपना बयान दिया है।मायावती ने कहा कि जैसा कि सर्वविदित है कि बसपा 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की नीतियों एवं सिद्धान्त पर चलने वाली विशिष्ट पहचान वाली पार्टी है, जो किसी भी समाज के व्यक्ति विशेष से ज़्यादा, परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के पवित्र संविधान की सच्ची मंशा के मुताबिक, सर्वसमाज के हित व कल्याण के लिए समर्पित है और इसीलिए पार्टी में नेताओं की नहीं, बल्कि पूरे तन, मन, धन से समर्पित अम्बेडकरवादी कार्यकर्ताओं की ही फौज हर स्तर पर अधिकतर सक्रिय है। यही मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा पार्टी व मूवमेन्ट के हित में स्थापित परम्परा भी है।
पारिवारिक स्वार्थ के लिए फायदा उठाया
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इसीलिए ब्राह्मण समाज व अन्य सभी समाज के जो भी लोग अभी तक पार्टी से निकाले गए हैं या निकाले जा रहे हैं या वे अपने निजी स्वार्थ में दूसरी पार्टियों में चले गए हैं या फिर वे अपने गलत कारनामों की वजह से उनसे बचने के लिए ख़ासकर सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो गए हैं, तो उनका पार्टी के प्रति समर्पण भाव लोगों की निगाह में भी उनके कार्यों के आकलन के आधार पर काफी सशंकित व निराशाजनक बना रहा है, क्योंकि खासकर बसपा सरकार के दौरान भी ऐसे लोगों ने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए ही पार्टी से फायदा ज़्यादा उठाया है और अपने समाज व पार्टी के हित के लिए वे लोग अधिकतर निष्क्रिय व उदासीन ही बने रहे हैं।
अपने लोगों को बसपा में नहीं जोड़ा
इतना ही नहीं, बल्कि इन्हीं सब कारणों से उन लोगों ने अपनेे समाज को भी सही से बसपा में नहीं जोड़ा है, जो कि पार्टी की अपेक्षा के विरुद्ध इनका यह सब कृत्य होने की वजह से पिछले कई लोकसभा व विधानसभा आमचुनावों में पार्टी को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है, लेकिन उसके बाद से पार्टी में लम्बे अरसे से ईमानदार व हर मामले में पार्टी के प्रति लगातार समर्पित एवं निष्ठावान चले आ रहे पार्टी के वरिष्ठ लोगों द्वारा आए दिन नये कर्मठ व ईमानदार लोगों व ख़ासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार किया जाता रहा है, जो यह अभियान पूरी तरह से जारी है और अब वे लोग काफी हद तक पार्टी की अपेक्षा के अनुसार जी-जान से लगातार लगे हुए हैं। पार्टी को पूरी उम्मीद है कि ये सभी नए व पुराने लोग हर मामले में ज़्यादा बेहतर, साफ-सुथरे व मिशनरी मानसिकता के बनकर उभरेंगे और वे सच्चे अम्बेडकरवादी एवं संविधानवादी संघर्ष के भरपूर तौर पर काम आएंगे।
दलित समाज को अहम भूमिका निभानी होगी
इसके साथ ही, पार्टी ख़ासकर ब्राह्मण समाज को यह भी विश्वास दिलाना चाहती है कि वे अपनी पूरी मज़बूती के साथ पार्टी से जुड़े रहें और उन्हें हर चुनाव में उनकी तैयारी के आधार पर उनकी भागीदारी यानी चुनावी उम्मीदवार बनाने और सरकार बनने पर सन 2007 की तरह ही इनको व अन्य सभी समाज को भी पूरा-पूरा उचित मान-सम्मान ज़रूर दिया जाता रहेगा और सर्वसमाज आधारित ऐसी अपनी बसपा को ज़मीनी स्तर पर तैयार करने के मामले में अब विशेषकर दलित समाज को ही अपनी अहम भूमिका निभानी है। वैसे बसपा की नर्सरी, सर्वसमाज के हसीन गुलदस्तों से ही, अधिकतर हरी-भरी व सजी रहती है
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