लखनऊ: LDA अप्रूवल का झांसा देकर 338 गज का प्लॉट बेचने का आरोप, अंसल ग्रुप के चेयरमैन समेत 9 पर केस
लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में अंसल API के चेयरमैन सुशील अंसल, प्रणव अंसल समेत 9 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है।

लखनऊ: अंसल ग्रुप के खिलाफ उत्तर प्रदेश में चल रही कानूनी कार्रवाई के बीच राजधानी लखनऊ में कंपनी के शीर्ष अधिकारियों पर एक और मुकदमा दर्ज हुआ है। सुशांत गोल्फ सिटी थाने में मेसर्स अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Ansal API) के चेयरमैन सुशील अंसल, वाइस प्रेसिडेंट प्रणव अंसल समेत 9 नामजद अधिकारियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि LDA से स्वीकृत लेआउट और विकास कार्य का भरोसा देकर 338 वर्ग गज का प्लॉट आवंटित किया गया, लेकिन बाद में न तो रजिस्ट्री हुई और न ही जमीन पर कब्जा दिया गया।
LDA अप्रूवल और विकास कार्य का दिखाया भरोसा
मध्यप्रदेश के रीवा निवासी और वर्तमान में लखनऊ के गोमतीनगर के विनम्र खंड में रहने वाले ऋषि कान्त शुक्ला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी बहन अनू मिश्र ने वर्ष 2008 में सुशांत गोल्फ सिटी में आवासीय प्लॉट लेने के लिए अंसल कंपनी के कार्यालय में संपर्क किया था।
आरोप है कि कंपनी के प्रतिनिधियों ने LDA से स्वीकृत नया लेआउट दिखाया और मौके पर विकास कार्य चलने की जानकारी देते हुए 338 वर्ग गज का प्लॉट बुक कराया। इसके बाद प्लॉट से संबंधित एग्रीमेंट भी कराया गया।
लाखों रुपये लेने का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक, कंपनी की ओर से प्लॉट के डेवलपमेंट, रजिस्ट्री खर्च और बाउंड्रीवॉल के नाम पर अलग-अलग समय में रकम जमा कराई गई। आरोप है कि करीब 4.50 लाख रुपये, 12 लाख रुपये और 5 लाख रुपये से अधिक की रकम कंपनी को दी गई।
शिकायत में कहा गया है कि रकम जमा करने के बाद जब प्लॉट पर कब्जा लेने की बात आई तो कंपनी के अधिकारी लगातार टालमटोल करते रहे। पारिवारिक समझौते के बाद प्लॉट ऋषि कान्त शुक्ला के नाम ट्रांसफर हुआ। उन्होंने इसके लिए बैंक से होम लोन भी लिया, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद कंपनी ने न तो जमीन की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया।
जिस जमीन का प्लॉट बताया, उस पर कंपनी के स्वामित्व पर सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बाद में जांच करने पर पता चला कि जिस जमीन पर विकास कार्य दिखाकर प्लॉट बेचने की बात कही गई थी, उस जमीन पर कंपनी का वास्तविक स्वामित्व ही नहीं था।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि कंपनी के अधिकारियों ने सरकारी अप्रूवल और कूटरचित दस्तावेजों व नक्शों का इस्तेमाल कर उसे गुमराह किया और उससे रकम ली।
चेयरमैन, वाइस प्रेसिडेंट समेत इन अधिकारियों पर आरोप
मामले में सुशील अंसल और प्रणव अंसल के अलावा तत्कालीन प्रेसिडेंट एवं सीईओ अरुण मिश्र, दिनेश गुप्ता, लैंड इंचार्ज योगेश गहवा, मार्केटिंग प्रभारी अमित मलिक और सीएफओ प्रशांत कुमार समेत अन्य अधिकारियों को नामजद किया गया है।
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