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एक तरफ चिराग पासवान तो दूसरी तरफ 'डबल मांझी', बीच में आरक्षण और पटना से दिल्ली तक घमासान

हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन ने चिराग पासवान पर फिर से जवाबी हमला बोला है। मुद्दा है आरक्षण। एक बार फिर से पटना से दिल्ली तक आरक्षण के मसले पर सियासी घमासान छिड़ गया है।

Gaurav Dwivedi
August 29, 2026
3 min read
 एक तरफ चिराग पासवान तो दूसरी तरफ 'डबल मांझी', बीच में आरक्षण और पटना से दिल्ली तक घमासान

पटना: एक तरफ हैं केंद्र सरकार में मंत्री चिराग पासवान और दूसरी तरफ हैं 'डबल मांझी'। पहले तो केंद्र सरकार में ही दूसरे मंत्री जीतन राम मांझी और दूसरे उनके बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन। पिछले एक हफ्ते से जब से चिराग का 'आरक्षण कोई खैरात नहीं' वाला बयान आया है, तब से दोनों नेताओं के बीच जबरदस्त जुबानी जंग हो रही है। जीतन राम मांझी और उनके बेटे ने आरक्षण की समीक्षा की बात कर एक तरह से घमासान शुरू कर दिया है।

जीतन राम मांझी के बेटे ने फिर खोला सियासी तोप का मुंह

जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन ने एक बार फिर से आरक्षण पर अपना स्टैंड क्लियर किया है। हालांकि इस दफे ये स्टैंड नहीं बल्कि चिराग पासवान को खरी-खरी सुनाई गई है। संतोष सुमन बिहार की सम्राट सरकार में मंत्री के साथ HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा है कि 'आरक्षण पर समीक्षा की बात आते ही कुछ लोग इसे आरक्षण समाप्त करने की मांग बताने लगते हैं। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं हम आरक्षण खत्म करने की बात नहीं कर रहे हैं। हम आरक्षण को और न्यायपूर्ण, प्रभावी और वास्तविक रूप से वंचित लोगों तक पहुंचाने की बात कर रहे हैं।' जाहिर है कि उन्होंने सीधे तौर पर चिराग पासवान को बिना नाम लिए जवाब दिया है।

'सबसे बुरे हाल वाले समुदाय की स्थिति पर चर्चा क्यों न हो?'

संतोष सुमन ने कहा है कि 'मेरा सीधा सवाल है अगर आरक्षण का उद्देश्य समाज के सबसे वंचित व्यक्ति को उसकी हिस्सेदारी और सम्मान दिलाना है, तो फिर यह जानने में डर कैसा कि पिछले दशकों में आरक्षण का लाभ किसे कितना मिला? समीक्षा का अर्थ आरक्षण समाप्त करना नहीं है। समीक्षा का अर्थ है आंकड़ों के आधार पर यह देखना कि आरक्षण का लाभ सभी वंचित समुदायों तक समान रूप से पहुंचा या नहीं। अगर किसी समुदाय का प्रतिनिधित्व आज भी शिक्षा, सरकारी नौकरी और उच्च प्रशासनिक पदों में बहुत कम है, तो उसकी स्थिति पर चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए?'

नीतीश कुमार ने दिया पहली बार हक: संतोष

संतोष सुमन ने आरक्षण में कोटे के अंदर कोटे की मांग को भी स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि 'इसी सोच के आधार पर हमने वर्गीकरण और कोटे में कोटा की मांग की है। यह मांग किसी का आरक्षण छीनने की नहीं, बल्कि आरक्षण के भीतर ही उन समुदायों को उनका न्यायपूर्ण हिस्सा दिलाने की है जो अब भी सबसे अधिक वंचित हैं। जिस तरह पिछड़े वर्गों में अत्यंत पिछड़े वर्गों की अलग पहचान बनी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए EWS की व्यवस्था आई और बिहार में आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी ने दलित समुदाय के भीतर सबसे अधिक वंचित समूहों की पहचान के लिए महादलित की अवधारणा सामने रखी, उसी तरह SC/ST आरक्षण के भीतर भी आंकड़ों के आधार पर अत्यंत वंचित समुदायों की पहचान होनी चाहिए।'

आखिर में चिराग पासवान को बिना नाम लिए सुनाया

आखिर में संतोष कुमार सुमन ने बगैर चिराग पासवान का नाम लिए उन्हें इशारों में सुनाया है। उन्होंने कहा कि ' जो लोग समाज के नेता होने का दावा करते हैं, उनकी जिम्मेदारी केवल मजबूत और प्रभावशाली वर्गों की आवाज उठाना नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज बनना भी है जो आज भी सामाजिक भेदभाव, गरीबी और अवसरों की कमी से जूझ रहे हैं।'

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